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Aur Bhi Kuch Kahna Hai: Kavita Sankalan
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Aur Bhi Kuch Kahna Hai: Kavita Sankalan
By None
Current price: $1.34


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"जीवन के साथ साहित्य का अटुट संबंध है । जहाँ तक प्रश्न कविता का है वह तो हमारे अंत: स्थल की वाणी है । प्रस्तुत कविता संग्रह और भी कुछ कहना है..... कवि दीपंकर जेना की सोच, विचार और भावधारा को सब के सामने लाने का उपक्रम है । समकालीन परिदृश्य में तुकबंदी को कुछ लोग कविता मानने लगे हैं, लेकिन यह संग्रह उससे कोसों दूर है । इसमें मानव की पीड़ा, टीस, भोगे हुए यथार्थ को अभिव्यक्ति मिली है ।
आज के समाज में घट रही घटनाओंको कवि ने प्रतीक और बिंब का सहारा लिए एकदम सामान्य बोलचाल की भाषा में शब्द का जामा पहनाया है । यही इस संग्रह की खूबी है जिससे पुस्तक को हाथ लिए पाठक सारी कविताओं को चाहत भरी नजर से एक ही सांस में पढ़ लेना चाहता है ।
जीवन के साथ साहित्य का अटुट संबंध है । जहाँ तक प्रश्न कविता का है वह तो हमारे अंत: स्थल की वाणी है । प्रस्तुत कविता संग्रह और भी कुछ कहना है..... कवि दीपंकर जेना की सोच, विचार और भावधारा को सब के सामने लाने का उपक्रम है । समकालीन परिदृश्य में तुकबंदी को कुछ लोग कविता मानने लगे हैं, लेकिन यह संग्रह उससे कोसों दूर है ।
इसमें मानव की पीड़ा, टीस, चीन्ता, फिक्र, उलझन, भोगे हुए यथार्थ को अभिव्यक्ति मिली है ।
आज के समाज में घट रही घटनाओं को कवि ने प्रतीक और बिंब का सहारा लिए एकदम सामान्य बोलचाल की भाषा में शब्द का जामा पहनाया है । यही इस संग्रह की खूबी है जिससे पुस्तक को हाथ लिए पाठक सारी कविताओं को चाहत भरी नजर से एक ही सांस में पढ़ लेना चाहता है ।"
"जीवन के साथ साहित्य का अटुट संबंध है । जहाँ तक प्रश्न कविता का है वह तो हमारे अंत: स्थल की वाणी है । प्रस्तुत कविता संग्रह और भी कुछ कहना है..... कवि दीपंकर जेना की सोच, विचार और भावधारा को सब के सामने लाने का उपक्रम है । समकालीन परिदृश्य में तुकबंदी को कुछ लोग कविता मानने लगे हैं, लेकिन यह संग्रह उससे कोसों दूर है । इसमें मानव की पीड़ा, टीस, भोगे हुए यथार्थ को अभिव्यक्ति मिली है ।
आज के समाज में घट रही घटनाओंको कवि ने प्रतीक और बिंब का सहारा लिए एकदम सामान्य बोलचाल की भाषा में शब्द का जामा पहनाया है । यही इस संग्रह की खूबी है जिससे पुस्तक को हाथ लिए पाठक सारी कविताओं को चाहत भरी नजर से एक ही सांस में पढ़ लेना चाहता है ।
जीवन के साथ साहित्य का अटुट संबंध है । जहाँ तक प्रश्न कविता का है वह तो हमारे अंत: स्थल की वाणी है । प्रस्तुत कविता संग्रह और भी कुछ कहना है..... कवि दीपंकर जेना की सोच, विचार और भावधारा को सब के सामने लाने का उपक्रम है । समकालीन परिदृश्य में तुकबंदी को कुछ लोग कविता मानने लगे हैं, लेकिन यह संग्रह उससे कोसों दूर है ।
इसमें मानव की पीड़ा, टीस, चीन्ता, फिक्र, उलझन, भोगे हुए यथार्थ को अभिव्यक्ति मिली है ।
आज के समाज में घट रही घटनाओं को कवि ने प्रतीक और बिंब का सहारा लिए एकदम सामान्य बोलचाल की भाषा में शब्द का जामा पहनाया है । यही इस संग्रह की खूबी है जिससे पुस्तक को हाथ लिए पाठक सारी कविताओं को चाहत भरी नजर से एक ही सांस में पढ़ लेना चाहता है ।"


















