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गार्गी/ Gargi
Indigo
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गार्गी/ Gargi
Current price: $23.99


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Size: Paperback
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गार्गी अदम्य, अटूट अस्तित्व गार्गी की कहानी प्रियंका के नाम उसकी 9 साल की उम्र से शुरु होती है। इसी छोटी सी उम्र में जिस पड़ोस की मौसी को उसने अपनी मां माना उसको उसने अपने ही पिता के साथ हमबिस्तर देखा। गार्गी को सहारा मिला जब समीर उसके जीवन मे आया। कुछ दिन में उसे पता चल गया वो समीर का प्यार नहीं उसकी ज़िद थी। टूटते रिश्ते को बचाने के लिए वो किया जो किसी ने सोचा नहीं था। पर सब हुआ बेकार ... गार्गी ने हार नहीं मानी, लड़ती रही । उसको एक ऐसा कदम उठाना पड़ा जिसके बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं था.. क्या गार्गी अपने जख्मों को अपनी मेहनत के मरहम से भर पाई? या फिर निकल पड़ी एक ऐसी राह पर जिसकी किसी को उम्मीद ना थी ... क्या होंगे उसके सपने पूरे ...? About the Author: ऋचा खन्ना पिछले 20 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हैं और लखनऊ के वरदान इंटरनेशनल स्कूल की संयुक्त निदेशक हैं। मास कम्युनिकेशन और अंग्रेजी में पोस्टग्रेजुएट, उन्होंने बी.एड. भी किया है। करियर की शुरुआत मास मीडिया से की, और बाद में वरदान इंटरनेशनल अकादमी की स्थापना की। उन्हें 100 से अधिक पुरस्कार, जैसे ए.पी.जे. अब्दुल कलाम और इंदिरा अवार्ड, मिल चुके हैं। वे लखनऊ सीबीएसई सहोदया की जोनल सचिव और पूर्व चाइल्ड वेलफेयर कमेटी में मजिस्ट्रेट रह चुकी हैं। उनके लेख राष्ट्रीय स्तर के अखबारों में प्रकाशित होते हैं, जो समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करते हैं।
गार्गी अदम्य, अटूट अस्तित्व गार्गी की कहानी प्रियंका के नाम उसकी 9 साल की उम्र से शुरु होती है। इसी छोटी सी उम्र में जिस पड़ोस की मौसी को उसने अपनी मां माना उसको उसने अपने ही पिता के साथ हमबिस्तर देखा। गार्गी को सहारा मिला जब समीर उसके जीवन मे आया। कुछ दिन में उसे पता चल गया वो समीर का प्यार नहीं उसकी ज़िद थी। टूटते रिश्ते को बचाने के लिए वो किया जो किसी ने सोचा नहीं था। पर सब हुआ बेकार ... गार्गी ने हार नहीं मानी, लड़ती रही । उसको एक ऐसा कदम उठाना पड़ा जिसके बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं था.. क्या गार्गी अपने जख्मों को अपनी मेहनत के मरहम से भर पाई? या फिर निकल पड़ी एक ऐसी राह पर जिसकी किसी को उम्मीद ना थी ... क्या होंगे उसके सपने पूरे ...? About the Author: ऋचा खन्ना पिछले 20 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हैं और लखनऊ के वरदान इंटरनेशनल स्कूल की संयुक्त निदेशक हैं। मास कम्युनिकेशन और अंग्रेजी में पोस्टग्रेजुएट, उन्होंने बी.एड. भी किया है। करियर की शुरुआत मास मीडिया से की, और बाद में वरदान इंटरनेशनल अकादमी की स्थापना की। उन्हें 100 से अधिक पुरस्कार, जैसे ए.पी.जे. अब्दुल कलाम और इंदिरा अवार्ड, मिल चुके हैं। वे लखनऊ सीबीएसई सहोदया की जोनल सचिव और पूर्व चाइल्ड वेलफेयर कमेटी में मजिस्ट्रेट रह चुकी हैं। उनके लेख राष्ट्रीय स्तर के अखबारों में प्रकाशित होते हैं, जो समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करते हैं।


















