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Kalam Ka Majdoor : Premchand
Indigo
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Kalam Ka Majdoor : Premchand
Current price: $5.99
Original price: $6.53


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हिन्दी के जीवनी-साहित्य में बहुचर्चित यह पुस्तक स्वयं लेखक के अनुसार उसके करीब बीस वर्षों के परिश्रम का परिणाम है। ‘राजकमल’ से इसका पहला संस्करण 1965 में प्रकाशित हुआ था और यह एक महत्त्वपूर्ण कृति का पाँचवाँ संशोधित संस्करण है।
इस पुस्तक की तैयारी में समस्त उपलब्ध सामग्रियों का उपयोग करने के अतिरिक्त मुख्य रूप से प्रेमचन्द की ‘चिट्ठी-पत्री’ का सहारा लिया गया है, जिसके संग्रह के लिए मदन गोपाल ने वर्षों तक देश के विभिन्न भागों में सैकड़ों व्यक्तियों से पत्र-व्यवहार किया या भेंट की। इस दुर्लभ और अनुपलब्ध सामग्री के द्वारा प्रेमचन्द के जीवन-सम्बन्धी अनेक नए तथ्य प्रकाश में आए हैं। प्रेमचन्द के जीवन और कृतियों के रचना-काल एवं प्रकाशन-सम्बन्धी जो बहुत-सी भूलें अभी तक दुहराई जाती रही हैं, उन्हें भी लेखक ने यथासाध्य छानबीन करके ठीक करने का प्रयास किया है। इस प्रकार ‘कलम का मज़दूर : प्रेमचन्द’ हिन्दी में प्रेमचन्द की पहली प्रामाणिक और मुकम्मल जीवनी है, जिसमें आधुनिक युग के सबसे समर्थ कथाकार की कृतियों का जीवन्त ऐतिहासिक सन्दर्भ और सामाजिक परिवेश प्रस्तुत किया गया है। जैसा कि इस पुस्तक के नाम ‘कलम का मज़दूर : प्रेमचन्द’ से ही स्पष्ट है, इसमें प्रेमचन्द के वास्तविक व्यक्तित्व को पूरी सच्चाई और ईमानदारी के साथ उभारकर रखने का प्रयास किया गया है।
प्रेमचन्द के व्यक्तित्व के अनुरूप ही सीधी-सादी अनलंकृत शैली में लिखी हुई इस पुस्तक की शक्ति स्वयं तथ्यों में है। कुछ दुर्लभ चित्र पुस्तक का अतिरिक्त आकर्षण हैं।
हिन्दी के जीवनी-साहित्य में बहुचर्चित यह पुस्तक स्वयं लेखक के अनुसार उसके करीब बीस वर्षों के परिश्रम का परिणाम है। ‘राजकमल’ से इसका पहला संस्करण 1965 में प्रकाशित हुआ था और यह एक महत्त्वपूर्ण कृति का पाँचवाँ संशोधित संस्करण है।
इस पुस्तक की तैयारी में समस्त उपलब्ध सामग्रियों का उपयोग करने के अतिरिक्त मुख्य रूप से प्रेमचन्द की ‘चिट्ठी-पत्री’ का सहारा लिया गया है, जिसके संग्रह के लिए मदन गोपाल ने वर्षों तक देश के विभिन्न भागों में सैकड़ों व्यक्तियों से पत्र-व्यवहार किया या भेंट की। इस दुर्लभ और अनुपलब्ध सामग्री के द्वारा प्रेमचन्द के जीवन-सम्बन्धी अनेक नए तथ्य प्रकाश में आए हैं। प्रेमचन्द के जीवन और कृतियों के रचना-काल एवं प्रकाशन-सम्बन्धी जो बहुत-सी भूलें अभी तक दुहराई जाती रही हैं, उन्हें भी लेखक ने यथासाध्य छानबीन करके ठीक करने का प्रयास किया है। इस प्रकार ‘कलम का मज़दूर : प्रेमचन्द’ हिन्दी में प्रेमचन्द की पहली प्रामाणिक और मुकम्मल जीवनी है, जिसमें आधुनिक युग के सबसे समर्थ कथाकार की कृतियों का जीवन्त ऐतिहासिक सन्दर्भ और सामाजिक परिवेश प्रस्तुत किया गया है। जैसा कि इस पुस्तक के नाम ‘कलम का मज़दूर : प्रेमचन्द’ से ही स्पष्ट है, इसमें प्रेमचन्द के वास्तविक व्यक्तित्व को पूरी सच्चाई और ईमानदारी के साथ उभारकर रखने का प्रयास किया गया है।
प्रेमचन्द के व्यक्तित्व के अनुरूप ही सीधी-सादी अनलंकृत शैली में लिखी हुई इस पुस्तक की शक्ति स्वयं तथ्यों में है। कुछ दुर्लभ चित्र पुस्तक का अतिरिक्त आकर्षण हैं।


















