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Usaki Yaden Kuchh Mulakate: Premika Ki Yad Mein Premi Ka Haal-Behal

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By None

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"प्यारे दोस्तों मैं 'कुमार पंछी' अपनी स्वरचित पुस्तक ""उसकी यादें कुछ मुलाकातें"" में प्रेम को लेकर अपने भाव को उजागर किया है। मैंने अपनी इस पुस्तक में अपने प्रेम के अनुभव को प्रकट किया है। समाज में कई जगह लोग प्रेम के पहले भी खिलाफ के और आज भी खिलाफ है, किंतु प्रेम किसी के रंग, रूप, किसी की जाति, किसी का धर्म, किसी का देश, या किसी विशेष को नहीं समझता, बल्कि प्रेम तो एक सकारात्मक भावना है, एक एहसास है जो किसी से भी हो सकता है। प्रेम एक इंसान को दूसरे इंसान से भी हो सकता है, प्रेम इंसान को अपनी मां से हो सकता है, अपने पिता से हो सकता है, अपने दोस्तों से हो सकता है, अपने भाई बहनों से हो सकता है, अपने देश से हो सकता है, अपने देश बंधुओं से हो सकता है, अपने जीवनसाथी से हो सकता है, अपने बच्चों से हो सकता है, और अपनी प्रेमी-प्रेमिका से हो सकता है। भगवान शिव ने भी माता पार्वती से प्रेम किया था, भगवान श्री कृष्ण ने राधारानी से प्रेम किया था, इसी तरह सभी देवताओं ने प्रेम किया था क्योंकि प्रेम को पवित्र माना गया है, किंतु आज की दुनिया में प्रेम की परिभाषा लोगों ने बदल कर रख दी है। लोगों की नजरों में प्रेम एक हवस बन चुका है। दोस्तों आज फिर से प्रेम को एक पवित्र धागे में पिरोकर प्रेम की उपमा को बढ़ाते हैं और प्रेम को अपने शब्दों द्वारा कविता का रूप देकर लोगों के सामने प्रस्तुत करते हैं। धन्यवाद। "
"प्यारे दोस्तों मैं 'कुमार पंछी' अपनी स्वरचित पुस्तक ""उसकी यादें कुछ मुलाकातें"" में प्रेम को लेकर अपने भाव को उजागर किया है। मैंने अपनी इस पुस्तक में अपने प्रेम के अनुभव को प्रकट किया है। समाज में कई जगह लोग प्रेम के पहले भी खिलाफ के और आज भी खिलाफ है, किंतु प्रेम किसी के रंग, रूप, किसी की जाति, किसी का धर्म, किसी का देश, या किसी विशेष को नहीं समझता, बल्कि प्रेम तो एक सकारात्मक भावना है, एक एहसास है जो किसी से भी हो सकता है। प्रेम एक इंसान को दूसरे इंसान से भी हो सकता है, प्रेम इंसान को अपनी मां से हो सकता है, अपने पिता से हो सकता है, अपने दोस्तों से हो सकता है, अपने भाई बहनों से हो सकता है, अपने देश से हो सकता है, अपने देश बंधुओं से हो सकता है, अपने जीवनसाथी से हो सकता है, अपने बच्चों से हो सकता है, और अपनी प्रेमी-प्रेमिका से हो सकता है। भगवान शिव ने भी माता पार्वती से प्रेम किया था, भगवान श्री कृष्ण ने राधारानी से प्रेम किया था, इसी तरह सभी देवताओं ने प्रेम किया था क्योंकि प्रेम को पवित्र माना गया है, किंतु आज की दुनिया में प्रेम की परिभाषा लोगों ने बदल कर रख दी है। लोगों की नजरों में प्रेम एक हवस बन चुका है। दोस्तों आज फिर से प्रेम को एक पवित्र धागे में पिरोकर प्रेम की उपमा को बढ़ाते हैं और प्रेम को अपने शब्दों द्वारा कविता का रूप देकर लोगों के सामने प्रस्तुत करते हैं। धन्यवाद। "

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